‘मुझे धमकी न दें…’ सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमआर शाह और वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे के बीच हुई तीखी नोकझोंक

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नई दिल्ली. गुजरात में जिला जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े एक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह और वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे के बीच सोमवार को तीखी नोकझोंक देखने को मिली.

दरअसल दुष्यंत दवे ने जस्टिस शाह और सीटी रविकुमार की दो सदस्यीय बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली एक अन्य पीठ पहले से ही इस तरह की पदोन्नति, सेवा शर्तों और नियुक्तियों से जुड़ी अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ की याचिका पर सुनवाई कर रही है, तो फिर ऐसे में जस्टिस शाह और जस्टिव रविकुमार की बेंच इस मामले को निपटाने की तत्परता क्यों दिखा रहा है.

‘कुछ भी कहने के लिए मजबूर न करें’
अदालती मामलों पर खबर देने वाली वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दवे ने दो सदस्यीय बेंच के समक्ष कहा, ‘माई लॉर्डशिप इसे निपटाने की जल्दबाजी में क्यों हैं, जब कोर्ट 1 बड़े मामले पर विचार कर रही है? मैं गंभीरता से आपत्ति जताता हूं.’

दवे की इस दलील पर जस्टिस शाह ने थोड़ा सख्त लहजे में कहा, ‘मेरे करियर के अंत में, मुझे आपके बारे में कुछ भी कहने के लिए मजबूर न करें. (केस की) मेरिट पर बहस करें.’

इस पर दुष्यंत दवे नाराज दिखे और उन्होंने कहा, ‘माई लॉर्ड, मुझे धमकी मत दीजिए. मैं अपनी बात कह रहा हूं.’

क्या है पूरा मामला?
बता दें कि गुजरात सरकार और गुजरात हाईकोर्ट ने जिला न्यायाधीश पदों पर मेरिट-कम-सिन्योरिटी के आधार पर नियुक्तियां करना का निर्णय लिया था, जिसके खिलाफ जिला न्यायाधीश पदों के उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. जस्टिस शाह और जस्टिस रविकुमार की बेंच इसी याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जहां दवे एक निजी प्रतिवादी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे.

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यहां मौजूदा सिद्धांत के अनुसार वरिष्ठता से पहले मेरिट को आधार बनाना चाहिए. इसमें यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं की तुलना में बहुत कम अंक वाले उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया है.

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