Raksha Bandhan 2023 : कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें भाई की कलाई पर राखी बांधने की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

by Top Hindustan
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Raksha Bandhan 2023: भाई की कलाई पर रक्षासूत्र या फिर कहें राखी बांधने का इंतजार बहनों को पूरा साल बना रहता है. भाई और बहन के स्नेह से जुड़ा यह पावन पर्व हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, लेकिन इस साल इस रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के समय को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है. तमाम लोगों के मन में इस बात की भी शंका है कि यदि 30 अगस्त 2023 को राखी मनाई जाएगी तो क्या रात को राखी बांधना शुभ होगा. इस दिन लगने वाले पंचक को भी लेकर लोग परेशान है. यदि आपके मन में भी कुछ ऐसे ही सवाल हैं तो आइए आपकी इन सभी शंकाओं को देश के जाने-माने ज्योतिषियों और कर्मकांडी पंडितों के माध्यम से दूर करते हैं.

Raksha Bandhan 2023 : कब मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें भाई की कलाई पर राखी बांधने की सही तारीख और शुभ मुहूर्त

कब और किस समय बांधें राखी

संगम नगरी प्रयागराज के जाने-माने ज्योतिषी एवं कर्मकांडी पंडित देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार भद्रा के समय में कभी भी होली और रक्षाबंधन जैसे पर्व नहीं मनाए जाते हैं. ऐसे में इस साल 30 अगस्त 2023, बुधवार के दिन रात्रि 09:01 बजे से लेकर रात्रि 12 बजे के बीच में ही राखी बांधना शुभ रहेगा. काशी के पंडितों ने भी सर्वसम्मति से 30 अगस्त की रात्रि को रक्षाबंधन मनाना उचित ठहराया है. वाराणसी के पंडित अतुल मालवीय और उत्तराखंड ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष पंडित रमेश सेमवाल के अनुसार भी भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए 30 अगस्त की रात को 09 से 12 का समय सबसे उत्तम रहेगा.

तब मिल सकता है अशुभ फल

पंडित देवेंद्र के अनुसार 31 अगस्त 2023 की सुबह बहनों को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहुत कम समय मिल पाएगा, इसलिए उन्हें 30 की रात्रि में ही अपने भाई को राखी बांधना चाहिए क्योंकि यदि राखी बांधने में थोड़ा भी समय आगे-पीछे होता है तो शुभ के बजाय अशुभ फल की प्राप्ति होने की आशंका बनी रहेगी.

पंचक का कितना पड़ेगा असर

रक्षाबंधन वाले दिन सिर्फ भद्रा ही नहीं लोग पंचक होने को लेकर भी लोग परेशान हैं. लोगों के मन में शंका है कि क्या पंचक के दौरान बहनों का अपने भाई को राखी बांधना उचित होगा. इस सवाल के जवाब में प्रयागराज के पंडित देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी कहते हैं कि रक्षाबंधन के पर्व के लिए भद्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी क्योंकि इस दौरान किया गया कार्य शुभ और सफल नहीं होता है, जबकि इसके लिए पंचक पर विचार नहीं किया जाता है. यदि घर में किसी की मृत्यु न हुई हो तो आप पंचक के दौरान देवी-देवताओं की पूजा और ईश्वरीय कार्य कर सकते हैं.

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