छह साल में बनी फिल्म, शोले के इस मशहूर एक्टर के काट दिए गए थे सारे सीन, सिनेमाघरों में रिलीज होते ही लग गया था फ्लॉप का ठप्पा

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नई दिल्ली: किसी भी फिल्म को बहुत ही शिद्दत के साथ बनाया जाता है. डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और कलाकार जमकर पसीना बहाते हैं और खूब पैसा भी लगता है. फिर फिल्म अगर बिग बजट और बड़े स्टार्स वाली हो तो उम्मीदें बढ़ जाती हैं. लेकिन अगर यही फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन से ही हांफने लगे और इस पर फ्लॉप का ठप्पा लग जाए तो इससे जुड़े लोगों हालात और जज्बात को समझा जा सकता है. ऐसी ही एक फिल्म 1993 में रिलीज हुई थी. इस फिल्म का ऐलान 1987 में मिस्टर इंडिया की सक्सेस पार्टी के दौरान किया गया था. फिल्म के लिए डायरेक्टर के तौर पर शेखर कपूर को साइन किया गया.

 

सब तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं. लेकिन फिल्म की प्रोग्रेस से मिस्टर इंडिया के डायरेक्टर शेखर कपूर खुश नहीं रहे और उन्होंने बीच में ही इस फिल्म से हाथ खींच लिया. इसके बाद जिम्मा मिला सतीश कौशिक को. अनिल कपूर और श्रीदेवी की इस फिल्म पर पानी की तरह पैसा बहाया गया. फिल्म को बनने में छह साल लगे और इसकी लागत बहुत बढ़ गई. लेकिन जैसे ही फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो इसके एक्टर को एहसास हो गया कि गलती हो गई है. बिग बजट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पानी मांगती नजर आई और ढेर हो गई.

 

हम बात कर रहे हैं 1993 में रिलीज हुई श्रीदेवी, अनिल कपूर और अनुपम खेर की फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ की. फिल्म को लेकर जबरदस्त हाइप थी. खूब पैसा लगाया गया था. भव्य तरीके से सीन और गाने शूट हुए. ट्रेन डकैती का महंगा सीन भी क्रिएट किया गया. लेकिन फिल्म कहीं भी दर्शकों से कनेक्ट बनाने में कामयाब नहीं रह सकी और इसका नतीजा बॉक्स ऑफिस पर शिकस्त के रूप में देखने को मिला. बड़ी उम्मीदों से बनाई इस फिल्म को जनता ने सिरे से नकार दिया. लेकिन इस फिल्म में शोल फेम एक एक्टर के साथ बहुत ही नाइंसाफी भी हुई. यह एक्टर थे ए.के. हंगल. ए.के. हंगल के सारे सीन ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ से हटा दिए गए थे.

 

दिलचस्प यह कि जब कोई फिल्म फ्लॉप होती है तो उसके बाद आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होता है. ऐसा ही रूप की रानी चोरों का राजा को लेकर भी हुआ. मीडिया में फिल्म के राइटर जावेद अख्तर पर खराब लेखने के आरोप लगे. कहानी को औसत बताया गया. लेकिन वहीं अनिल कपूर भी आगे आए. उन्होंने कहा कि स्क्रिप्ट को उन्होंने ही क्लियर किया था और फिल्म को बनाने में उन्हें छह साल का समय लग गया. इस तरह सबने अपने हिसाब से जिम्मेदारी ली. लेकिन जो नुकसान होना था हो गया था.

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